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क्रिप्टोकरेंसी को लेकर क्या कहती है आरबीआई की तिमाही रिपोर्ट, सरकार हो सकती है और ज्यादा सतर्क

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर क्या कहती है आरबीआई की तिमाही रिपोर्ट, सरकार हो सकती है और ज्यादा सतर्क
UP City News | Dec 31, 2021 03:17 PM IST

नई दिल्ली. भारत में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को लेकर जहां भारतीय रिवर्ज बैंक (RBI) और सरकार (Indian Government) पहले ही सकर्तकत बरत रहे हैं वहीं एक बार फिर आरबीआई (RBI) की तिमाही वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में इसको लेकर चिंता जाहिर की गई है. रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक की ओर से इस बात की ओर इशारा किया गया है कि खासतौर पर निजी क्रिप्टोकरेंसी को गैरकानूनी तरीके से सीमापार वित्तीय लेनदेन या आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की राह में रोड़ा बन सकती है. इसके चलते अभी तक क्रिप्टोकरेंसी को लेकर बहुत संभल—संभलकर कदम उठाने वाली भारत सरकार और ज्यादा सतर्क हो सकती है.

बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर केंद्र सरकार ने मौजूदा शीतकालीन सत्र में एक विधेयक लाने की तैयारी की थी, लेकिन अंतिम समय में उसे टाल दिया गया था. वहीं अब आरबीआई ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की एक शोध रिपोर्ट का हवाला दिया है और कहा कि बिना नाम-पहचान वाली क्रिप्टोकरेंसी पूरे इकोसिस्टम के लिए खतरा बन रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि इससे पारदर्शिता बनाने की कोशिशों को धक्का लग रहा है. जबकि गैरकानूनी वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा मिल रहा है. इसके चलते नई तकनीक व व्यवस्थाएं भी बन रही हैं. जिसमें शामिल लोगों की पहचान नहीं हो सकेगी.

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मीडिया ​रिपोर्ट के मुताबिक विश्व की 100 शीर्ष क्रिप्टोकरेंसी का कुल बाजार पूंजीकरण 2.8 लाख करोड़ डालर यानी करीब 210 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है. आरबीआई के अनुसार क्रिप्टो में बड़े पैमाने पर निवेश से रियल इकोनमी को बड़ा खतरा है. वहीं आरबीआई के गवर्नर डा. शक्तिकांत दास पहले ही क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कई बार अपनी शंका जाहिर कर चुके हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सार्वजनिक तौर पर क्रिप्टोकरेंसी जैसी तकनीक को लोकतंत्र के लिए एक चुनौती बताते हुए दुनियाभर के शीर्ष नेतृत्व को क्रिप्टो पर वैश्विक नियमावली बनाने का सुझाव दिया था.