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एटा: स्थाई लोक अदालत में नहीं होते तत्काल वाद निस्तारित, एक वर्ष से नहीं हुई अध्यक्ष की नियुक्ति

एटा: स्थाई लोक अदालत में नहीं होते तत्काल वाद निस्तारित, एक वर्ष से नहीं हुई अध्यक्ष की नियुक्ति
UP City News | Oct 12, 2021 06:22 PM IST

एटा. प्रदेश शासन ने लोगों की समस्याओं को तत्काल निस्तारण हेतु भले ही स्थाई लोक अदालतों का गठन कर दिया है साथ ही समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रचार प्रसार भी किया जा रहा हो, लेकिन धरातल पर वास्तविकता कुछ और ही है. जिले में एक साल से स्थाई लोक अदालत में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के चलते आम अदालतों की तरह ही लोगों को तारीख दर तारीख के लिए भटकना पड रहा है. स्थाई लोक अदालत के वादकारियों ने प्रदेश के मुखिया से इन अदालतों में अध्यक्षों की नियुक्ति की मांग की है ताकि उनके जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके.

प्रदेश सरकार ने छोटी मोटी समस्याओं के लिए दशकों में तय होने बाले वादों को तत्काल निस्तारण के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिलों में स्थाई लोक अदालतों का गठन कर दिया गया है साथ ही इन अदालतों के माध्यम से वादों को तत्काल निस्तारण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा समाचार पत्रों के माध्यम से प्रचार प्रसार भी कराया जा रहा है. लेकिन जनपद एटा में एक बर्ष से इस अदालत में अध्यक्ष की नियुक्ति ना होने के चलते दूसरी अदालतों की तरह भी लोगों को तारीख पर तारीख दी जा रही हैं वही यह भी तय नहीं है कि कब तक इस अदालत में अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकेगी जिससे वाद दायर करने बाले वाद कारियों की समस्याओं का समाधान हो सकेगा. वादकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जिले की स्थाई लोक अदालत में शीघ्र से शीघ्र अध्यक्ष की नियुक्ति की मांग की है ताकि उनकी समस्याओं का समाधान जल्दी हो सके. मांग करने वालों में अजय कुमार, एस. खान सैफी, महेश कुमार, अजय सिंह, उमेशचन्द्र, विजयप्रताप सिंह, आर.ए. आदि प्रमुख हैं.

पांच सौ से अधिक वादों के नस्तारण के लिए वादकारी परेशान

स्थाई लोक अदालत के सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि इस अदालत में लगभग एक हजार के लगभग वाद तत्काल निस्तारण की आस में दर्ज हो चुके हैं, लेकिन इस अदालत के अध्यक्ष कब नियुक्त होकर आऐगे और कब तक उनके वादों का निस्तारण हो सकेगा ये एक भविष्य की बात है.

इस तरह के वादों का किया जाता है निस्तारण

सडक, रेल यातायात, सेवा के मामले, बिजली, पानी देने बाले विभाग, अस्पताल, आषधालय से जुडी सेवाएं, स्कूल, कोचिंग से जुडे मामले, टेलीफोन सेवा के मामले, लोक सफाई और स्वच्छता प्रणाली, वीमा से जुडी सेवाएं, आवास से जुडे मामले आदि.