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Etah News: थानों मे महिला सफाई कर्मी बनी बंधुआ मजदूर, कैसे करें भरण पोषण

Etah News: थानों मे महिला सफाई कर्मी बनी बंधुआ मजदूर, कैसे करें भरण पोषण
UP City News | Nov 24, 2021 08:37 PM IST

एटा. एक तरफ सरकार लोगों को विकास कार्यो, मजदूरी एवं न्यूनतम मानदेय/ वेतन की बात कर चुनाव में फतह हासिल कर सत्ता में आना चाहती है साथ ही वेटी बचाओ वेटी पढाओ का नारा बुलंद कर रही है. वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के पुलिस थानों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी महिला सफाई कर्मियों को सरकार ने बंधुआ मजदूर बनाकर छोड दिया है. यदि इन महिला सफाई कर्मियों को मिलने बाले दैनिक वेतन की बात करें तो सफाई किए जाने के बाद मिलने बाले वेतन से 30 दिन का कपडे धोने का सावुन भी नसीव नहीं हो सकता है जो कपडे इनके थानों की सफाई करते समय गंदे हो जाते हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इनके परिवार का भरण पोषण कैसे होता होगा.

जिले के थानों में दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मियों का दुःख दर्द जानने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता संतोष कुमार मौर्य ने जिले के प्रत्येक थानों में कार्यरत कर्मचारियों के घर- घर जाकर जाना सफाई कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर रोते- रोते- बताया कि उनका पूरा जीवन इन थानों में सफाई कार्य करते हुए निकला जा रहा है, लेकिन उनको मात्र एक हजार दो सौ रूपया ही वेतन के रूप में मिल रहा है. इनके इस वेतन से अधिक तो गांवों में तैनात चौकीदार लेते हैं जिनको सप्ताह में केवल एक दिन नही थाने की हाजिरी देनी होती है. इन चौकीदारों को दैनिक वेतन के अलावा वर्दी, टार्च, जूते साईकिल आदि भी दिया जाता है और एक तरफ हम लोग जो इनकी गंदगी को साफ करते हैं फिर भी मात्र 1200/- रूपया प्रति माह दिया जा रहा है. लेकिन हमें एक आस जैसी प्रतीत होती रहती है कि किसी दिन सरकार को हमारी भी याद आऐगी लेकिन अब हमे वह आस भी टूटती नजर आ रही है। सफाई कर्मियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मांग की है कि हमारे परिवारों की तरफ भी योगी जी देखो कि हम लोग अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करें.

क्या बोली गुडडो देवी

थाना अवागढ पर कार्यरत गुडडो देवी ने कहा कि एक किलो दूध 50/ रूपया का आता है जो महीने में एक हजार पांच सौ होते हैं मै थाने से मिलने बाले वेतन से बच्चो को चाय नहीं पिला सकती तो क्या कर सकती हूॅ मुख्यमंत्री सभी का मानदेय बढा रहे है हमारा नहीं हमें लगता है कि हम सफाई कर्मियों से उनकी कोई पुरानी दुश्मनी रही होगी.

थाना मारहरा पर तैनात कितावश्री का कहना है कि 15 बर्ष पूर्व मेरे 1200/ मानदेय हुआ था तब से अब तक एक भी रूपया नहीं बढा है सरकार को ऐसा लग रहा है कि हम लोगों पर मंहगाई का कोई असर नहीं है क्योंकि उनके द्वारा हमें वेतन ही इतना दिया जा रहा है कि उससे हम परिवार भी आसानी से चलाकर वचत भी कर सकते है. यह कथन और पीडा केवल दो थानों की ही नहीं बल्कि जिले के जैथरा की सुनीता देवी, राजा का रामपुर की सुनहरी देवी, नयागांव की सुनीता, जसरथपुर की मुन्नी देवी, निधौली कलां की गिरजा देवी आदि की दर्द भरी पीडा सुनकर आंखों से आसूं निकल पडते हैं. क्या प्रदेश के मुखिया को यह जानकारी नहीं है कि इन बेचारी महिलाओं का 1200/ रूपया में कैसे गुजारा होता होगा.