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सूखा के बाद रिकार्ड तोड वारिष से किसान आया सडक पर, भुखमरी के आसार

सूखा के बाद रिकार्ड तोड वारिष से किसान आया सडक पर, भुखमरी के आसार
UP City News | Sep 23, 2022 06:34 AM IST

एटा. नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले 14 घंटे से हो रही लगातार बारिश लोग घरों में छुपने के लिए मजबूर हो गए हैं. वहीं घरों से बाहर निकलकर जो भी देखता हैं. वहां बाजारों से लेकर खेत खलियानों में पानी ही पानी नजर आता है. जहां कस्बा के बाजार में दर्जनों स्थानों पर जलभराव की स्थिति है, तो वहीं दुकानों एवं घरों में बने हुए भूतल की स्थित बद से बततर है. नगर के मुख्य नाला बाजार चिंता हरण गली ईसौली चौराहा, शेरगंज, बड़ा बाजार, किला रोड, महावीर गंज, मंडी जवाहरगंज, बौहरान गली, मोहल्ला हथोड़ा, शादात आदि इलाकों में जलभराव के अलावा मारहरा, मिरहची, एटा, अवागढ, निधौली, जैथरा आज कई इलाकों में जलभराव की स्थिति लोग घरों में कैद रहने के लिए है मजबूर तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में भरा पानी दो-दो फुट ऊंचाई तक भरे हुए पानी से धान बाजरा की फसल चौपट होने के कगार पर पहुंच चुकी है.

नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के मौसम में भी बरसात ना होने के कारण सूखा पड़ने के आसार दिखाई दे रहे थे लेकिन पिछले 3 दिनों से लगातार हो रही बारिश में किसानों को कुछ राहत दी थी लेकिन अत्यधिक वर्षा हो जाने के कारण अब किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. गांव में गलियां पानी से भरी है तो शहर की सड़कें भी जलभराव की स्थिति से गुजर रही है. आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा.हैं. भारतीय किसान यूनियन भानु के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने शासन प्रशासन से अनुरोध किया है कि उक्त बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन आकलन कराएं एवं गरीब मजदूर किसानों को हरजाने के लिए प्रयास करें.

वहीं, अवागढ, मारहरा, मिरहची आदि में दो दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण दर्जनों गांव की धान एवं बाजरा की पकी खड़ी लगभग तीस हजार बीघा जमीन पानी में जलमग्न हो गई है, वही बाजरा की खेती में भी काफी नुकसान हुआ है. गांव तथा नगर की सभी गलियों और थाना कोतवाली, स्कूल आदि भवनों में जलभराव होने के चलते खतरा बढ गया है. वही, बर्षात के चलते 24 घंटे से गायब बिजली लुका छुपी का खेल खेल रही है. वही ग्राम मंडपुरा, प्राथमिक स्वास्थ केंद्र के जननी सुरक्षा केंद्र पर बना शहीद स्मारक पर और कई जगह बिजली के तारों पर भारी भरकम पेड़ भर भरा कर गिर पड़े जिससे बिजली व्यवस्था चौपट हो गई.