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क्या ये है असली लिलिपुट? ईरान में ढूंढ लिया गया बौनों का गांव, पूरे इलाके में मिलीं छोटी-छोटी इमारतें

क्या ये है असली लिलिपुट? ईरान में ढूंढ लिया गया बौनों का गांव, पूरे इलाके में मिलीं छोटी-छोटी इमारतें
UP City News | Nov 25, 2021 12:52 PM IST

दिल्ली. विगत अगस्त 2005 में प्राचीन फ़ारसी गांव मखुनिक में एक छोटा ममीकृत शव मिला था. यह गांव वर्तमान में ईरान में स्थित है. शोध में जानकारी हुई कि यह अवशेष एक किशोर बौने का था. इसके बाद प्राचीन शहर की खुदाई की गई तो उसकी वास्तुकला से प्रतीत हुआ कि यह गांव प्राचीन समय में बौनो का रहा होगा. अब यह शहर, जिसे कभी-कभी ईरानी लिलिपुट कहा जाता है, फिर से सुर्खियों में है. नई खोज के बाद ईरान पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस जगह को विकसित करने में जुटा है, जिससे प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर से दुनिया के लोग भी रूबरू हो सकें.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 2005 में नन्ही ममी की खोज के बाद शाहदाद शहर के पास केरमन प्रांत में गुडिज़ के ऐतिहासिक किले में दो महीने अवैध खुदाई की गई. य​ह किला ससादी साम्राज्य के समय का है. यह साम्राज्य (224 से 651 ई.) इस्लाम के उदय से पहले का अंतिम ईरानी साम्राज्य था. तस्करों द्वारा जर्मनी में इसे नन्ही ममी को तीन मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक में बेचने का प्रयास किया गया. मामले की जानकारी पर तस्करों को गिरफ्तार कर ममी को जब्त कर लिया गया था. बताया जाता है कि 25 सेमी (9.84-इंच) लंबी ममी अच्छी तरह से संरक्षित थी और एक पतले आवरण से ढकी थी. आवरण को पहले ममीकरण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री माना गया. हालांकि शोध के बाद जानकारी हो सकी कि यह व्यक्ति की त्वचा है. एक फोरेंसिक टीम द्वारा किए गए विश्लेषणों का अनुमान है कि मृत्यु के समय व्यक्ति की उम्र 16-17 वर्ष थी.

बौनों के शहर के खिलाफ दावे और खंडन
ईरान डेली ने दावा करते हुए कहा था कि जिस प्राचीन गांव में ममी पाई गई थी, वह ससानिद युग की नहीं थी अपितु वास्तव में 5,000 साल पुराना बौनों का शहर था. शाहदाद के बारे में एक महत्वपूर्ण पहलू घरों, गलियों और खोजे गए उपकरणों की अजीब वास्तुकला है। दीवारों, छत, भटि्ठयों, अलमारियों और सभी उपकरणों का उपयोग केवल बौने ही कर सकते हैं. ईरान डेली ने दावा किया था कि शहर से बौनों के जाने के 5,000 साल बाद प्रागैतिहासिक क्षेत्र का बड़ा हिस्सा मिट्टी में दब गया है और शाहदाद के बौनों का प्रवास रहस्य में बना हुआ है.

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Image source: Social Media

हालांकि पुरातत्वविदों ने प्रांत में बौनों के शहर का अस्तित्व होने की अफवाहों को खारिज कर दिया. शाहदाद शहर में 38 साल की पुरातात्विक खुदाई क्षेत्र में किसी भी बौने शहर से इनकार करती है. यहां बची दीवारें 80 सेंटीमीटर ऊंची हैं लेकिन मूल रूप से इनकी लंबाई 190 सेंटीमीटर थीं. कुछ बची दीवारें 5 सेंटीमीटर ऊंची हैं. ऐसे में यह तय है कि यहां रहने वाले लोग पांच सेंटीमीटर तक लंबे थे. खोज के कई महीनों बाद पेवंड ईरान न्यूज ने बताया कि मानवशास्त्रीय अध्ययनों से पता चला है कि छोटी ममी वास्तव में 400 साल पुरानी थी और यह किसी बौने से नहीं अपितु समय से पहले के बच्चे से संबंधित थी, जिसे प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ममीकृत किया गया था.

पर्यटन को बढ़ावा देने का किया जा रहा है प्रयास
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गांव की अनूठी वास्तुकला और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में अभी भी पर्यटन के लिए अप्रयुक्त क्षमता है. इस गांव को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए हाल ही में लगभग 17,000 डॉलर लगाए गए हैं. सरबिश के गवर्नर मोहम्मद मोहम्मदी ने कहा कि हमें पर्यटन को बढ़ावा देने और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए चेन्शट और मखुनिक के अद्भुत गांवों की क्षमता विकसित करने के लिए प्रयास करना चाहिए. इसके लिए हमें यात्रियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करना होगा. इसके लिए सांस्कृतिक और पर्यटक आकर्षण वाले गांवों में इको-लॉज के रूप में आवासीय स्थान नहीं बनाने होंगे.