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पति मरने की कगार पर, पत्नी कोर्ट से बोली— मुझे पति का स्पर्म चाहिए

पति मरने की कगार पर, पत्नी कोर्ट से बोली— मुझे पति का स्पर्म चाहिए
UP City News | Jul 21, 2021 03:18 PM IST

अहमदाबाद. गुजरात हाईकोर्ट में एक अजीब मामले की याचिका दायर हुई है. इस याचिका में एक पत्नी ने पति का स्पर्म सुरक्षित करने की मांग की. इसके बाद हाईकोर्ट ने इसके लिए मंजूरी दे दी है. पत्नी ने कोर्ट में गुहार लगाते हुए कहा कि उसका पति अस्पताल में अंतिम सांसें गिन रहा है. अगर उसके पति को कुछ हो गया तो उनके प्रेम की निशानी के तौर पर पति के स्पर्म से मातृत्व सुख प्राप्त करना चाहती है. पत्नी की इस विनती पर कोर्ट ने उसे इसके लिए मंजूरी दे दी है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिला का पति इस साल मई में कोरोना वायरस से ग्रसित हो गया था. हालत ज्यादा बिगड़ने की वजह से वह तब से वेंटिलेटर के सहारे जीवित है. बीते दिनों डॉक्टरों ने यह जानकारी दी थी कि पति के पास जीवित रहने के लिए ज्यादा समय नहीं है. जिसके बाद परिवार में गम का माहौल है. पति के न रहने पर अपना जीवन आखिर किसके सहारे जिएगी.

इसी आशा में हाईकोर्ट में पत्नी ने यह याचिका दायर की. मिली जानकारी के अनुसार पत्नी ने कोर्ट से कहा कि 'मैं अपने पति के स्पर्म से मातृत्व सुख पाना चाहती हूं, लेकिन मेडिकल लॉ इसकी इजाजत नहीं देता. हम दोनों के प्यार की अंतिम निशानी के तौर पर पति का स्पर्म दिलाने की अनुमति प्रदान की जाए. मेरे पति के पास बहुत कम समय बचा है. वह कोरोना संक्रमण की वजह से दो माह से वेंटिलेटर के सहारे जीवित हैं.' अदालत ने पत्नी की याचिका पर स्पर्म लेने की अनुमति प्रदान कर दी है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पत्नी ने बताया कि हम दोनों कनाडा में चार साल पहले एक दूसरे से संपर्क में आए और वहीं दोनों की शादी बीते साल के अक्टूबर माह में हुई थी. फरवरी 2021 में ससुर को हार्ट अटैक आने की वजह से भारत आना पड़ा. इसके बाद यहां पति कोरोना संक्रमित हो गए. इससे उनके फेफड़े पूरी तरह संक्रमित हो गए और वह दो महीने से वेंटिलेटर पर हैं. तीन दिन पहले डॉक्टर्स ने परिजनों को बताया कि पति की तबीयत में सुधार होने की कोई संभावना नहीं है. उनके पास सिर्फ तीन दिन का समय शेष है.'

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पत्नी ने बताया कि जब उन्होंने डॉक्टरों से पति के स्पर्म को संरक्षित करने के लिए बोला. तो डॉक्टरों ने इसके लिए मना कर दिया. पूछने पर बताया कि पति की की सहमति के बिना उनके स्पर्म को संरक्षित नहीं किया जा सकता. मेडिकल लॉ में इसके लिए इजाजत नहीं है. इसके बाद सास-ससुर से बात करने के बाद हम तीनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. हाईकोर्ट में जाने की तैयारी के दौरान ही हमें बताया गया कि पति के पास सिर्फ 24 घंटे का वक्त बचा है.