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क्या सच में पशुओं की तरह चारा खाता है ये व्यक्ति, लेकिन क्यों, जिसने देखा वो रह गया हैरान

क्या सच में पशुओं की तरह चारा खाता है ये व्यक्ति, लेकिन क्यों, जिसने देखा वो रह गया हैरान
UP City News | Aug 06, 2022 11:55 AM IST

गोरखपुर. ये खबर महराजगंज जिले से है. जहां जनपद में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति अपने मंदिर परिसर के भीतर पशुओं के खाने के लिए बनाई गई मिट्टी के नाद में पशुओं का भोजन भूसा और चारा खाते हुए नजर आ रहा है. उसे देखने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी हुई है. ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी के हर तीसरे साल व्यक्ति के शरीर में भस्मासुर प्रवेश कर जाते हैं जिससे वह इस तरह का व्यवहार कर पशुओं का भोजन भूसा और चारा को ग्रहण करता है.

तस्वीरों में पशुओं की तरह भोजन कर रहा व्यक्ति महराजगंज जनपद के कोल्हुई थाना क्षेत्र स्थित रुद्रपुर शिवनाथ गांव का रहने वाला है. बुद्धिराम है. वह बीते 40 से 45 सालों से नागपंचमी पर्व की हर तीसरे साल गांव में ही स्थित माता के मंदिर में स्थापित भैंसासुर की प्रतिमा के सामने पशुओं के खाने के नाद में पशुओं की तरह ही भूसा और चारा खाता है. बुद्धिराम का मानना है कि नागपंचमी के दिन उसके शरीर में भैंसासुर का प्रवेश हो जाता है जिससे वह पशुओं की तरह व्यवहार करता है.

बुद्धिराम का कहना है कि लगभग 40 से 45 साल पहले वह फुटबॉल खेलने जा रहा था. तभी रास्ते में वह पेशाब करने लगा लेकिन उसे नहीं पता था कि वहां किसी मन्दिर का स्थान है. पेशाब करने के बाद उसके शरीर में भैंसासुर का प्रवेश हो गया. कुछ दिनों तक वह अजीब हरकतें करने लगा. काफी पूजा.पाठ के बाद उसे शांति मिली. जिसके बाद नाग पंचमी के हर तीसरे साल उसके शरीर में भैंसासुर का प्रवेश हो जाता है और वह पशुओं जैसी हरकत कर मंदिर में पूजा पाठ करते हैं. जहां लोग काफी दूर.दूर से आते हैं. बुद्धिराम ने बताया कि नागपंचमी के हर तीसरे साल भइसासुर का पूजा दिया जाता है और घास भूसा लोग श्रद्धा पूर्वक खिलाते हैं और दर्शन करने आते हैं.

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बुद्धिराम ने बताया कि जब सभी लोग दर्शन करके चले जाते हैं तो 2 . 4 घंटे बाद फिर वह पहले जैसे हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि जब से वह इस तरह कर रहे हैं तब से उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती है. एक मनुष्य का पशुओं की तरह व्यवहार करना और पशुओं की तरह खाना सुनने और देखने में अजीब लगता है कुछ लोग इसे आस्था का नाम देते हैं तो कुछ अंधविश्वास का. आज के इस वैज्ञानिक युग में ज्यादातर लोग इसे अंधविश्वास ही मानते हैं. वही कुछ लोग इस तरह के अंधविश्वास में भी अपनी आस्था और विश्वास रखने के साथ ही इन हरकतों का समर्थन करते हैं.