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क्या आप चीन के टेराकोटा योद्धाओं के बारे में जानते हैं, कौन था वो पहला राजा जिसने 13 साल की उम्र में बनवाया अपना मकबरा

क्या आप चीन के टेराकोटा योद्धाओं के बारे में जानते हैं, कौन था वो पहला राजा जिसने 13 साल की उम्र में बनवाया अपना मकबरा
UP City News | Nov 27, 2021 11:29 AM IST

नई दिल्ली. आज हम बात कर रहे हैं, चीन में प्रसिद्ध प्राचीन टेराकोटा योद्धाओं की खोज के बारे में. यह एक बहुत ही सुंदर अवसर था जब चीन में इसकी खोज की गई. इस बात से तो हम सब ही वाकिफ हैं कि इतिहास एक ऐसा समुंदर है जिसकी गहराई का पता लगा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. अगर चीन की बात की जाए तो उसका इतिहास भी काफी पुराना है. चीनी इतिहास में इतने राजा आए इतनी सभ्यताएं आईं जिन के विषय में पता लगा पाना लोहे के चने चबाने के बराबर है. इन राजाओं ने अमर बनने के लिए अनेकों कार्य किए उन्हीं में से एक हैं प्रसिद्ध चीन के टेराकोटा योद्धाओं की. पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार अगर टेराकोटा योद्धाओं को देखे तो प्रत्येक में विशिष्ट विशेषता दिखाई देती हैं. शिल्प कौशल का एक अद्भुत और अविश्वसनीय उपलब्धि देखने को मिलती है. यह गुप्त मूर्तियां चीन के शासक प्रथम शासक"किन शिहुआंग" के साथ जमीन में दफन की गई थी ऐसा क्यों किया गया था इसी तथ्य के बारे में आज हम पढ़ेंगे....तो आज हम फिर इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और और जानते हैं कि चीन के प्रथम सम्राट किन शि हुआंग , के मकबरे के बारे में.

बात लगभग 246 साल पूर्व की है. जब चीन के साक्षी प्रांत में 13 साल की उम्र में एक युवा राजा ने अपना मकबरा बनाने के लिए हुक्म दिया. 38 साल की उम्र में यह सभी बिखरे हुए राज्यों को एकजुट करने में सफल रहा और चीन के पहले सम्राट किन शि हुआंग बने. विशेषज्ञों के अनुसार इस सम्राट ने लगभग 259 से 210 ईसा पूर्व तक चीन पर शासन किया. चीन की महान दीवार का निर्माण भी इन्होंने ही कराया था. जैसे-जैसे सम्राट का स्थापत्य बढ़ने लगा तो इसे अपनी मृत्यु के बाद होने वाली नीरसता को लेकर चिंतित रहने लगे. इसलिए उसने आदेश जारी किया कि उसके लिए एक बहुत बड़े मकबरे का निर्माण कराया जाए. यह मकबरा जमीन के अंदर बनाया जाए और इसमें उसकी पूरी सेना के बराबर मिट्टी के पुतले बनाए जाए.

इससे पहले धरती पर कितना बड़ा मकबरा नहीं बनाया गया था. राजा के हुक्म की तामील हुई और इस मकबरे के लिए सियांग शहर के उत्तरी पहाड़ों के पास रेगिस्तान जैसी जगह को चुना गया. जहां जमीन के नीचे खुदाई कर राजा की कब्र बनाई गई और इसके साथ उनके टेराकोटा आर्मी के योद्धाओं व उनके घोड़ों तक के पुतले बनाए गए. इस खबर को मिट्टी से ढक दिया गया और पूरे बाय 2200 सालों तक यह मकबरा मानव की नजरों से छुपा रहा. पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार सन 1974 में जब एक किसान इसी स्थान पर कुआं बनाने के लिए खोदाई कर रहा था तो उसकी नजर इस जमीन में दफन इस कब्र पर पड़ी और चीन के इतिहास का यह बेशकीमती खजाना उसके हाथ लग गया.

इसके बाद अगले 10 सालों तक पुरातत्व विभाग के लोगों ने इस स्थान व इसके आसपास की जगहों पर खोदाई की इस दौरान लगभग 8000 के करीब सिपाहियों के पुतले मिले जिन्हें बेहद खूबसूरती से बनाया और पेंट किया गया था. खोदाई को जब और आगे बढ़ाया तब पता चला कि सम्राट के शव को भी यही दफन किया गया था. युआंग के 38 वर्ग मीटर कि पहले इस मकबरे में सम्राट के जीवन का हर—हर एक पहलू शामिल किया गया था. टेराकोटा योद्धाओं का निर्माण चीन के पहले सम्राट को सुरक्षा देने के लिए किया गया था यह प्रतिमा इंसान 476 से 221 ईसवी के युद्ध के समय की एकजुट सेना का प्रतिनिधित्व करती हैं. ऐसा माना जाता है कि इन्हें अलग-अलग हिस्सों में बनाया गया.

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फिर इन हिस्सों को आपस में जोड़कर इन पर रंग किया गया है. इस मकबरे को बनाने में लगभग 40 वर्ष का समय लगा था. जबकि कुछ का कहना है कि इसे बनाने में 10 वर्ष का समय लगा था. उनके मुताबिक जब राजा ने बाकी सभी राज्यों को हराकर एक संयुक्त चीन बनाया तब उसने इन मकबरों का काम काम शुरू कराया था. इस परियोजना में भारी संख्या में मजदूरों ने काम किया जो राजवंश के पतन के करीब आने के कारण रुका हुआ था. विशेषज्ञों के अनुसार अब तक 4 गड्ढे आंशिक रूप से खोदे जा चुके हैं. 3:00 में टेराकोटा सैनिक, घुड़सवार, रथ तथाणहथियार शामिल हैं चौथा गधा खाली पाया गया जो अधूरे निर्माण की एक वसीयतनामा है.

इस मकबरे में मिले पत्रों की जांच में यह पाया गया कि टेराकोटा योद्धाओं के इन पुतलों ने बहुत सी चीजों का सामना किया. भूकंप—बाढ़ को भी झेला. जांच की गई तो पता चला कि साढ़े 3 मीटर मोटी दीवार भी थी. परंतु बाढ़ के कारण यह केवल 1.73 मीटर की ही रह गई. जिसके चलते बाढ़ और भूकंप इत्यादि का इन पुतलों पर काफी असर पड़ा. इतिहासकारों के मुताबिक इस मकबरे को क्षति पहुंचाने की एक और कोशिश की गई थी. जो पश्चिमी क्षेत्र के अधिपति टू शियांग यू द्वारा की गई थी. इसका प्रमाण के दौरान मिले हथियार बयान करते हैं. माना जाता है कि इस कोशिश के पीछे का मकसद मकबरे में मौजूद पानी की तलवार व अन्य हथियार पाने की लालसा रही होगी.

खोदाई में जांच कर रहे लोगों ने जली हुई मिट्टी के कुछ अवशेष भी मिले. जिससे पता चला कि टेराकोटा के बने इन बुतों को खत्म करने के लिए उन्हें जलाने का भी प्रयास किया गया था. इस कार्य को कौन कर सकता है. इसकी जानकारी प्राचीन चीनी हस्तलेखों में मिलती है. जिसके अनुसार सम्राट ने जिन राज्य को तबाह कर दिया था और इसके परिवार को भी मरवा दिया था. यही कारण है कि वो लोग सम्राट के मकबरे को खत्म करना चाहता थे. कुछ समय बाद इस मकबरे को राज की निजी संपत्ति घोषित कर दिया गया और साल 2005 में क्योंकि सरकार ने इसे अपने अधीन करते हुए इसकी सारी देखभाल की जिम्मेदारी अपने सांस्कृतिक अवशेषों के संरक्षण विभाग को सौंप दी.