सिटी न्यूज़

एक ऐसा शख्स जिसने लाल किला और ताज महल को बेच डाला एक विदेशी को!

एक ऐसा शख्स जिसने लाल किला और ताज महल को बेच डाला एक विदेशी को!
UP City News | Apr 24, 2021 07:57 PM IST

अजब गजब. क्या आपने कभी ताजमहल की चोरी के बारे में सोचा, जी हां, ताजमहल की चोरी. अब आप सोच रहें होंगें कि ऐसा कैसे हो सकता है लेकिन आपको बता दें कि ऐसा ज़रूर हुआ है. तो चलिए आपको बताते हैं आपको इस रोमाचित बात के बारे में. क्या आप नटवरलाल का नाम जानते हैं? नटवरलाल को एक ऐसे चोर के नामे से जानते हैं जिसने ताजमहल तक को चोरीकर के बेच डाला था. नटवरलाल का वास्तविक नाम मिथलेश कुमार श्रीवास्तव था. कई लोगों का कहना है कि नटवरलाल के 50 से भी अधिक नाम थे. इन्हीं नामों के सहारे वह कई सारी ठगी को अंजाम देता था.

नटवरलाल के कारनामों की बात करें तो वह किसी भी व्यक्ति का हूबहू हस्ताक्षर कर सकता था. उसने यह एक हजार रुपए के लिए पड़ोसी के नकली हस्ताक्षर करके उसके बैंक से निकाले थे. यह पहली दफा था. ऐसे मामलों में नटवरलाल ने लोगों से लाखों रुपयों की ठगी की थी. साथ ही चोरी के बाद फरार होने में भी नटवरलाल काफी माहिर इंसान था. नटवरलाल इतना माहिर और शातिर चोर था कि वह पुलिस की पकड़ में आने के बाद भी वह फरार हो जाता. नटवरलाल के बारे में कहा जाता था कि वह काम चलाऊ अंग्रेजी बोल लेता था. नटवरलाल रंगबाज इंसान था. उसकी लपटी चपटी बातें किसी को भी अपनी गिरफ्त में ले सकती थी. कई बड़े व्यापारियों को उसने चूना लगाया था. आप जिसके चलते नटवरलाल ने कई मर्तबा ताज महल और लाल-किले को बेचा था. उसने इन्हें बाहर से आए विदेशियों को बेचा था यह हक़ीकत है. अब आप इसको शायद मज़ाक मान रहें होंगे लेकिन यह हक़ीकत है.

अगर नटवरलाल की कारनामों की बात करें तो धोखाधड़ी और जालसाजी के 8 राज्यों में कुल 100 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज किये गए थे. 70, 80 और 90 के दशक में  इसका नाम पूरे भारत में लोकप्रिय हुआ था. इस दौरान कई बड़े व्यापारियों को नटवरलाल ने अपना निशाना बनाया था. नटवर लाल के इन्हीं करतूतों की वजह से उसको 111 साल की सजा दी गई थी. आपको बता दें कि 2004 में नटवरलाल का नाम अंतिम बार किसी जुर्म में सामने आया था. बता दें इस दौरान एक वकील ने बताया था कि नटवर लाल ने अपना वसीयतनामा उसको दिया था. जिसके बाद नटवरलाल की मृत्यु कब और कैसे हुई? यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है. आज तक शोधार्थी शोध में जुटे हुए हैं लेकिन यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है. कई लोगों का कहना है कि उसकी मौत 2009 में हुई थी. वहीं उसके परिजनों का दावा है कि नटवरलाल 1996 में ही मर गया था. जिसके बारे में आज तक कोई भी स्पष्ट जानकारी मौजूद नहीं हो पाई है.