सिटी न्यूज़

सौ साल से भी अधिक समय से बन रहा दयालबाग का यह मंदिर, खूबसूरती ऐसी कि देखते रह जाओगे

सौ साल से भी अधिक समय से बन रहा दयालबाग का यह मंदिर, खूबसूरती ऐसी कि देखते रह जाओगे
UP City News | Aug 05, 2022 06:25 PM IST

आगरा. वैसे तो आगरा ताजमहल की वजह से देश विदेश में प्रसिद्ध है लेकिन यहां एक खूबसूरत मंदिर भी है जो सौ साल से अधिक समय से बन रहा है. जिसकी चमक और खूबसूरती हैरान करने वाली है. न्यू आगरा से पोइया घाट जाने वाली रोड पर पडऩे वाले राधास्वामी मंदिर का मुख्य द्वार विशाल एवं भव्य बनाया गया है. मंदिर पूरा सफेद पत्थरों का बना हुआ है. मुख्य द्वार से मंदिर का दृश्य और सुंदर दिख सके इसके लिए प्रवेश द्वार को पूरा लाल पत्थरों से बनाया गया है. लाल पत्थरों के बीच से सफेद मंदिर का दृश्य देखने लायक होता है. मंदिर के प्रवेश द्वार के निर्माण में प्रयोग होने वाले लाल पत्थरों को राजस्थान के भरतपुर जिले से मंगाया गया है.

संत परंपरा में राधा स्वामी मत अपना विशेष स्थान रखता है. आगरा के पन्नी गली में खत्री परिवार में जन्मे शिवदयाल सिंह ने इस राधा स्वामी मत की स्थापना की थी जो बाद में अपने भक्तों के बीच स्वामी जी महाराज के नाम से जाने गए. आगरा के स्वामीबाग में स्वामी जी महाराज की समाधि पर आज एक विशेष, भव्य और अलौकिक मंदिर बनकर तैयार हो गया है, इस मंदिर की नींव 1903 में डाली गई थी. आगरा के स्वामीबाग स्थित सफेद संगमरमर से बना राधास्वामी मंदिर आज लाखों करोड़ों श्रद्धालओं की आस्था को बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है.

बताया जाता है साल 1903 में इस मंदिर की आधार शिला रखी गयी थी और आज भी 100 साल बीत जाने के बाद आज भी लगातार इसका निर्माण कार्य हो रहा है. 161 फीट ऊंचे राधास्वामी मंदिर पर 31 फीट ऊंचे कलश की स्थापना की गई है जिस पर करीब 17 किलोग्राम सोने की परत चढ़ाई गयी है. कहा जाता है कि जब स्वामी जी महाराज के भक्तों की संख्या बढ़ने लगी और उनका पन्नी गली स्थित घर छोटा पड़ने लगा तो उन्होंने अपने आश्रम के लिए एक जगह तलाशना शुरू कर दिया.

वसंत पंचमी के दिन साल 1861 में स्वामी जी महाराज ने अपने राधास्वामी मत को शुरू किया और देखते ही देखते जब उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी तो उन्होंने एक मल्लाह से जगह खरीदकर स्वामीबाग आश्रम की स्थापना की जो आज के समय में राधास्वामी मत से जुड़े लोगों का सबसे बड़ा भक्ति का केंद्र है. 15 जून साल 1878 में स्वामी जी महाराज परलोक गमन हुए तो उनके द्वितीय सन्त हुजूर महाराज ने पवित्र रज को प्रतिष्ठापित किया और उनकी स्वामीबाग में ही समाधि बनाई, जहां स्वामी बाग में उन्होंने अंतिम समय बिताया और जहां वह अपने अनुयायियों के साथ सत्संग किया करते थे.

इस मंदिर में भारत की धरोहर नक्काशी, पच्चीकारी का अद्भुत कला नजर आती है, जो यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति यहां आता है, तो इसकी तारीफ करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं. मंदिर के चारों तरफ 20 फुट चौड़ी नहर भी बनाई गई है जिसमें फव्वारे लगे हुए हैं. पूर्व दिशा में स्वामी जी महाराज का पवित्र कुआं है जो बहुत खूबसूरती से मंदिर से ही जोड़ लिया गया है. दारचीनी पत्थर ग्वालियर, मध्य प्रदेश से लाकर लगाया गया है. पच्चीकारी और जड़ाई के लिए कीमती पत्थर अकीक, मरगज, सिमाक, रतक, गवा, बिल्लौर, लाजवर्द, गौरी, पितोनिया, डूंगासरा, यश बगैरा गुजरात और दक्षिण भारत से मंगवाए गए हैं.