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कोरोना की महामारी के तनाव और अवसाद से उबारेगी पुस्तक "राज की बात"..

कोरोना की महामारी के तनाव और अवसाद से उबारेगी पुस्तक "राज की बात"..
UP City News | May 05, 2021 09:08 AM IST

लेखिका राज फौजदार ने कोरोना के चलते अपने घर पर ही किया पुस्तक का अनौपचारिक लोकार्पण
आगरा. ज़िंदगी क्या है? यह हमें किसलिए मिली है? हम इसे किस प्रकार जिएँ? इसको सार्थक कैसे बनाएँ? दुखों से छुटकारा कैसे पाएँ? सच्चा सुख और सच्ची समृद्धि क्या है? ऐसी अनेक जिज्ञासाओं का समाधान करने की कोशिश है यह पुस्तक "राज की बात".कोरोना के चलते पुस्तक का अनौपचारिक लोकार्पण पुस्तक की लेखिका राज फौजदार ने अपने सिकंदरा स्थित आवास पर अपने परिवारीजनों के साथ किया.
राज फौजदार ने बताया कि इस पुस्तक में छोटे-छोटे 82 आलेखों के माध्यम से भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में शामिल इंसान को थोड़ा ठहर कर सोच-विचार करने की दिशा दी गई है, ताकि वह कोरोना की महामारी के तनाव और अवसाद से उबर कर शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो सके और भौतिकता से आध्यात्मिकता की ओर थोड़े से क़दम बढ़ा कर अपने जीवन की अनंत संभावनाओं के द्वार खोल सके.इस अवसर पर उनके पतिदेव अशोक कुमार फौजदार, पुत्र वैभव फौजदार व पुत्र वधू तथा यस वी कैन संस्था से जुड़ीं समाज सेवी श्रीमती प्रीति फौजदार प्रमुख रूप से शामिल रहीं.उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक का प्रकाशन निखिल पब्लिशर्स और संपादन कवि कुमार ललित ने किया है.
कोरोना से जंग लड़ने को एक फौजी की मां ने लिखी किताब..
ज़ब देश में युद्ध चल रहा हो उस समय सैनिकों के परिवारों पर क्या बीतती है, ये हम सभी जानते हैं पर फ़ौजी की माँ अपने बेटे की सलामती की दुआ के साथ साथ उसे हिम्मत भी देती है. ठीक उसी तरह आज देश में कोरोना का युद्ध चल रहा है और फिर एक बार एक फ़ौजी की माँ आगे आयीं हैं देश को हिम्मत देने अपनी कलम से...
इस घबराहट और घुटन भरे माहौल में उनकी लिखी किताब "राज की बात" उन लोगों के लिए संजीवनी हैं जो इस कोरोना के कहर से टूट रहे हैं. इस वायरस को हराया जा सकता है तो सिर्फ मजबूत इरादों से. ठीक उसी तरह की हिम्मत से जैसे जंग के मैदान में एक फ़ौजी दिखाता और वापस आता है जंग जीतकर. कर्नल वैभव फ़ौज़दार की माँ कई सालों से ये हिम्मत और ये हौसला उन्हें देती आ रही हैं और अब उन्होंने यही हौसला बांटा है देश की जनता के साथ अपनी किताब के माध्यम से. उनका कहना है कि इस देश का हर व्यक्ति इस युद्ध का वो सैनिक है जो अगर हिम्मत से काम ले तो ये कोरोना की जंग ज़रूर जीत जाएगा.