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मुहर्रमः हर आंख अश्कबार थी गम-ए-हुसैन में, इस्लाम की खातिर शहीद हो गए नवासा-ए-नबी

मुहर्रमः हर आंख अश्कबार थी गम-ए-हुसैन में, इस्लाम की खातिर शहीद हो गए नवासा-ए-नबी
UP City News | Aug 06, 2022 01:26 PM IST

आगरा. इन दिनों देश ही नहीं पूरी दुनिया गम-ए-हुसैन मना रही है. हर जगह-जगह हो रहीं मजिलसों में जिक्र-ए-इमाम हुसैन किया जा रहा है. करबला की शहादत को बयां किया जा रहा है. लोग करबला के बाकये को सुनकर गम जदा हैं. इसी सिलसिले में जुमे की रात को आगरा स्थित खानकाह आलिया कादरिया नियजिया आस्ताना ए मैकश में आका-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में मुशालमा मुनाकिद किया गया. इसमें करबला की बाकया, इस्लाम का पैगाम और हजरत इमाम हुसैन व अहले खानदान की शहादत को बया किया गया. बाकये के दौरान लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. शायर हाजी अफजाल नियाजी अकबराबादी ने गम हुसैन का करना कम नहीं इबादत से, खुल्द भी मिलेगी तो आप की इजाजत से...

आगरा में खानकाह आलिया कादरिया नियजिया आस्ताना ए मैकश में शुक्रवार की रात को यानी मुहर्रम की सात तारीख को आका-ए-हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में मुशालमा मुनाकिद किया गया. प्रोग्राम की सरपरस्ती सैयद अजमल अली शाह जाफरी निजामी ने की. निजामत शायर शाहिद नदीम ने की. सैयद अजमल अली शाह ने कहा कि जो जुल्म और सितम यजीद और उसके साथियों ने खानदाने रसूल पर किए, शायद ही कोई भूल सकता है. कर्बला में शहीद नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम और इंसानियत की खातिर अपनी शहादत दी.

नायब सज्जादा सैयद फैज अली शाह ने बताया कि मुहर्रम की दस तारीख में अल्लाह की तरफ से कई वाकियात ऐसे हुए है, जिसमें दस तारीख को आज भी याद किया जाता है. मुहर्रम की दस तारीख को अल्लाह ताला ने हजरत आदम अलेहहिस्सलाम और हजरत दाऊद की तोबा को कबूल किया था. हजरत इद्रीस को मकामे बुलंद की तरफ उठाया. हजरात इब्राहीम की विलादत हुई. हजरत याकूब की रौशनी वापस आई. हजरत युनुस को मछली के पेट से निकाला गया. हजरत मूसा से दरिया पार हुए और फिरोंन दरिया में डूब गया. हजरत इसा अलेहिससलाम को असमान की तरफ जिंदा उठाया गया. इसी तारीख में नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने नाना के दीन को बचाने के लिय तीर-नैजा- तलवार के बहत्तर जख्म खाकर 56 साल पांच महीने, पांच दिन की उम्र में जुमा के दिन 61 हि0 मुताबिक सन 680 को शहीद हो गए. हजरत इमाम हुसैन की शहादत अल्लाह की बारगाह में ऐसे कबूल हुई कि यह तारीख उनकी शहादत से मशहूर हो गई.

याजीदियों ने नन्हे अली असगर के हलक में तीर मारा
एडवोकेट अमीर अहमद जाफरी ने कहा कि जब जंग के दौरान जब नन्हे अली असगर को प्यास लगी थी, तब हजरत इमाम हुसैन ने यजीदियों की फौज से पानी मांगा था, लेकिन याजीदियों ने पानी न देकर नन्हे अली असगर के हलक में तीर मारा. अल्लाह ने नन्हे अली असगर की कुर्बानी को कबूल कर शहीद का दर्जा दिया.आगरा के मशहूर शायरों ने शिरकत की, जिनमें सुहैल लखनवी, हसन इकबाल रामपुरी, दिलकश जालोनवी, अंजुम अकबराबादी, सैयद रिजवान अहमद करार आदि ने हजरत इमाम हुसैन की जिंदगी पर रोशनी डाली. इस मौके पर सैयद सब्बर अली शाह, सय्यद मोहतासिम अली शाह, सय्यद गालिब अली शाह, नायब सज्जादा सय्यद फैज अली शाह, प्रोफेसर सय्यद फाईज अली शाह ने मेहमानों का शुक्रिया अदा किया.