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ख्वाजा के दीवानों की दीवानगी तो देखो, मोपेड से ही पहुंच गए आंबेडकर नगर से अजमेर

ख्वाजा के दीवानों की दीवानगी तो देखो, मोपेड से ही पहुंच गए आंबेडकर नगर से  अजमेर
UP City News | Feb 23, 2021 10:42 AM IST

आगरा. सरताज-ए-हिंद हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के दीवानों की बात ही कुछ और होती है. इस दुनिया में ख्वाजा गरीब नवाज के ऐसे अकीदतमंद और दीवाने हैं कि जब उन्हें उनके रोजे का दीदार करने हो तो दूरी चाहे कितनी भी क्यों न हो वो मायने नहीं रखता. ऐसा ही एक मामला आगरा के कोठी मीना बाजार में देखने को मिला. उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर से मोपेड से ही अजमेर का सफर शुरू कर दिया. छोटी सी मोपेड पर परिवार के तीन सदस्यों ने एक तरफ से 969 किलोमीटर का सफर तय कर दिया. छह दिन में कुल 1932 किमी की दूरी तय कर दी.

उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर से ख्वाजा शरीफ के उर्स में शामिल होने के लिए परिवार के तीन लोगों को कोरोना के कारण जब बस नहीं मिली तो वे मोपेड से ही अजमेर के सफर के लिए निकल गए. तीन दिन में उन्होंने 969 किमी की दूरी को तय करके ख्वाजा साहब के दर पर हाजिरी लगा दी. उर्स में से शामिल होकर आगरा के कोठी मीना बाजार में यूपी सिटी न्यूज को पूरा बाकया बताया.

अजमेर उर्स में शामिल होने के लिए मोपेड से ही पहुंच गया परिवार

बस नहीं तो मोपेड से ही चल दिए
हकीम सरफराज अहमद बताते हैं कि हम 1985 से लगातार अजमेर शरीफ उर्स में शामिल होने के लिए जा रहे हैं. इस बार कोरोना की वजह से आंबेडकर नगर से बसें नहीं आईं तो हमने मोपेड से जाने का फैसला किया. मोपेड से पहली बार अजमेर पहुंचे देखिए हमें उर्स शामिल होना था और ख्वाजा गरीब नवाज को हमें बुलाना था फिर पहुंचना भी जरूरी था फिर उसमें दिक्कत क्या देखनी. मोपेड से आने की सिर्फ यही वजह थी कि हमें उर्स में हर हाल में पहुंचना था.सरफराज अहमद से पूछा कि इतना लंबा सफर करने में दिक्कत नहीं हुई तो उन्होंने कहा कि ख्वाजा के दीवानों को दिक्कत नहीं होती.

तीन दिन में ही तय कर दी 969 किमी लंबा रास्ता
-सरफराज के बेटे रजा उल मुस्तफा ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज से ऐसी लगन है कि रास्ते का पता ही नहीं चला.जब ख्वाजा साहब बुलाते हैं तो फिर परेशानी नहीं होती. तीन दिन में ही 969 किमी का सफर तय करके आंबेडकर से अजमेर पहुंच गए. एक घंटा गाड़ी चलाते हैं तो आधा घंटा आराम भी करते हैं. दोनो ओर से छह दिन में 1932 किमी का रास्ता तय किया.

-मोहजमा खातून कहतीं हैं कि जब किसी से सच्ची निस्बत हो जाए तो फिर दूरी क्या और दिक्कत क्या, बस चले ही जाना होता है. बज्म-ए-खुद्दाम के महासचिव भैया जाहिर हुसैन ने कहा कि इनके जब्जे को हमारी तंजीम सलाम करती है. पहले बहुत से लोग साइकिल से जियारत करने के लिए जाते थे.