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हथनी 'फूलकली' ने नदी किनारे ‘जंबो फीस्ट’ का आनंद उठा मनाई आज़ादी की 10वीं वर्षगाँठ

हथनी 'फूलकली' ने नदी किनारे ‘जंबो फीस्ट’ का आनंद उठा मनाई आज़ादी की 10वीं वर्षगाँठ
UP City News | May 13, 2022 10:19 PM IST

मथुरा. उत्तर प्रदेश में भीख मांगने वाली हथनी के रूप में लगभग 50 वर्ष बिताने के बाद, हथनी "फूलकली" ने स्वतंत्रता की दसवीं वर्षगाँठ मनाई. वर्षों के दुर्व्यवहार और अपर्याप्त देखभाल ने उसे कई चिकित्सकीय परेशानियां जैसे कि फोड़े, संक्रमित घाव और कटे-फटे पैरों के तलवों के साथ छोड़ दिया था. दस साल पहले, वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने फूलकली को रेस्क्यू किया था. जिसके बाद उसे हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र, मथुरा में सुरक्षित जीवन जीने का एक नया अवसर मिला.

2012 में रेस्क्यू से पहले, फूलकली उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की सड़कों पर घूमने, भीख मांगने में अपना पूरा दिन बिताती थी. वर्षों के दुर्व्यवहार और उपेक्षा ने उसे कटे नाखून, दर्दनाक रूप से क्षतिग्रस्त फुटपैड और गंभीर बीमारियों के साथ छोड़ दिया था. जिसकी वजह से उसे ना केवल शारीरिक बल्कि मनोवैज्ञानिक आघात भी पंहुचा. इंसानों की तरह, हाथी भी भावुक होते हैं और अपने झुंड से अलग होने का उनके मनोवैज्ञानिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ता है. दशकों से, फूलकली को अन्य हाथियों के साथ रहने से वंचित रखा गया था. जिसकी वजह से उसे एकांत और क्रूर जीवन सहने के लिए मजबूर होना पड़ा।.

मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा संचालित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में, फुलकली के आने के बाद उसे माया नाम की हथनी से मिलवाया गया, जिसे 2010 में एक सर्कस से बचाया गया था. समय के साथ दोनों हथनियों में अटूट दोस्ती का बंधन बना और माया ने फूलकली की जिंदगी में एक दशक से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आज 65 साल की फूलकली पूरी तरह से बदल चुकी है. जिसने न सिर्फ अपनी ताकत बल्कि अपना आत्मविश्वास भी वापस हासिल किया है. फूलकली को यमुना नदी के किनारे लंबी सैर करने में मजा आता है, जो की सेंटर के करीब स्थित है. वह वहाँ पानी में खेलने में घंटों बिताती है.

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा वर्षों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार का फूलकली के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ा और उसे ठीक होने में काफी समय लगा. चल रहे उपचार के रूप में फूलकली को औषधीय फुटबाथ मिलता है. उसके फुटपैड नियमित रूप से ट्रिम किये जाते हैं और उसे पौष्टिक एवं स्वस्थ आहार दिया जाता है.

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा हाथी अत्यधिक बुद्धिमान और सामाजिक प्राणी होते हैं और जंगल या कैपटिविटी दोनों में ही एक दूसरे के साथ बेहद मजबूत पारिवारिक बंधन बनाते हैं. झुंड से अलग होना एक हाथी के लिए बेहद तनावपूर्ण और दर्दनाक हो सकता है. हम फूलकली माया और एम्मा के बीच विश्वास और दोस्ती के बंधन को देखकर खुश हैं.