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आगरा में संत की समाधि खोदने की सूचना पर जुटी भीड़, नहीं मिली अनुमति

आगरा में संत की समाधि खोदने की सूचना पर जुटी भीड़, नहीं मिली अनुमति
UP City News | Aug 05, 2022 05:25 PM IST

आगरा. ताजनगरी के पिढ़ौरा गांव में सर्पदंश से हुई संत की मौत के बाद उनके शव को समाधि दे दी गई. पांच दिन बाद परिजनों को उनके जिंदा होने का सपना आया तो शुक्रवार को समाधि खोदने की सूचना पर भीड़ जुट गई. हालांकि अभी तक समाधि नहीं खोदी जा सकी है. संत को जिंदा करने के लिए बंगाल से तांत्रिक भी आए थे. संत सांपों को पकड़ने में माहिर थे.

31 जुलाई को संत राघवानंद ग्रामीण दौजीराम के घर पर निकले सांप को पकड़ने गए थे. सांप को पकड़ते समय सांप ने उन्हें डंस लिया था. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी. परिजनों ने संत को झगोली माता मंदिर के परिसर में दफना कर उनकी समाधि बना दी थी. 4 अगस्त को संत के परिजनों को सपना आया कि सपने में संत ने कहा कि वो जिंदा हैं. उन्हें जिंदा दफना दिया गया है. उन्हें बाहर निकाला जाए. संत को जिंदा करने के लिए राजस्थान के बायगीरों को भी बुलाया गया. शुक्रवार को संत की समाधि निकालने की बात कही गई.

संत के जिंदा होने और समाधि से बाहर निकालने की जानकारी पर झगोली माता मंदिर पर आसपास के गांव के ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकालने की अनुमति नहीं दी. राजस्थान के सुंदरगढ़ आश्रम से आए बायगीर संत संतोष ने वहां पहुंचकर पूजा पाठ की. इसके बाद उन्होंने बाबा के जिंदा न होने की बात कहकर समाधि खोदने से मना कर दिया. काफी देर इंतजार के बाद ग्रामीण वापस लौट गए.