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फिरोजाबाद की Tundla सीट पर दो दशक बाद लहराया जा सका केसरिया परचम

फिरोजाबाद की Tundla सीट पर दो दशक बाद लहराया जा सका केसरिया परचम
UP City News | Nov 26, 2021 01:57 PM IST

फिरोजाबाद. कभी मैनपुरी और आगरा में शामिल टूंडला विधानसभा 1967 में फिरोजाबाद जिला बनने के बाद अस्तित्व में आई. 1974 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ. हालांकि इससे पहले यहां आगरा और मैनपुरी संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी अपनी किस्मत अजमाते रहे. आगरा और एटा जिले की सीमा से जुड़ी इस विधानसभा सीट में निर्णायक भूमिका ठाकुर के साथ निषाद वोटर निभाते हैं. इस विधानसभा से चौधरी मुल्तान सिंह को 1962 से लेकर 1969 तक तीन बार लगातार विधायक चुने गए. 1990 के दशक तक यहां जनता दल का झंडा बुलंद रहा लेकिन क्षत्रपों का उदय होने के बाद यहां सपा और बसपा ने भी खूब राजनीति की. 1996 में एक बार फिर केसरिया झंडा बुलंद हुआ तो इसके बाद सपा की साइकिल और बसपा का हाथी यहां मदमस्त नजर आया. 2017 में प्रो. एसपी सिंह बघेल ने यहां कमल के लिए जमीन तैयार कर दो दशक बाद इस सीट पर केसरिया फहरा दिया और प्रदेश की योगी सरकार में काबीना मंत्री बने. बाद में आगरा लोकसभा से सांसद बनने के बाद 2019 में यहां उपचुनाव हुआ और यहां की जनता ने एक बार फिर भाजपा का साथ देते हुए प्रेमपाल सिंह धनगर को विधानसभा भेजा.

टूंडला विधानसभा में मतदाता
पुरुष             1,99,484
महिला           1,72,472
कुल               3,71,974

टूंडला विधानसभा का जातिगत आंकड़ा
जाति                    मतदाता
जाटव                  65 हजार
ठाकुर                  40 हजार
बघेल                   40 हजार
यादव                   40 हजार
ब्राह्मण                  26 हजार
मुसलमान             20 हजार
जाट                     16 हजार
निषाद                  15 हजार
कुशवाह               15 हजार
लोधी                    12 हजार
वाल्मीकि              10 हजार
दिवाकर               10 हजार
नाई                       8 हजार
शंखवार                 8 हजार
चक                       5, 500
राठौर                    5 हजार
कुम्हार                  5 हजार
कश्यप                  4 हजार
नट                        1 हजार

पिछले चुनावी रण के महारथी
वर्ष            प्रत्याशी                 पार्टी           वोट       मतदान प्रतिशत
2017      प्रो. एसपी सिंह बघेल भाजपा      118584       69.7%
2012      राकेश बाबू                बसपा        67949       63.5%
2007      राकेश बाबू                बसपा        50002       41.9%

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खारा पानी यहां की प्रमुख समस्या
लंबे समय से अपनी राजनीतिक पहचान रखने के बावजूद इस विधानसभा के लोग आज भी खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. प्रत्येक विधानसभा चुनाव में पानी की समस्या का निराकरण कराने का आश्वासन देने वाले जनप्रतिनिधियों ने हर बार यहां की जनता को छला है. यही कारण है कि चुनाव के समय विरोध की सबसे अधिक घटनाएं ​पूरे जिले में इसी विधानसभा में होती है. कई बार चुनाव बहिष्कार कर चुके इस विधानसभा के लोगों को अब तक समस्याओं के निराकरण होने की दरकार है. इसके साथ ही धनगर जाति प्रमाणपत्र को लेकर प्रदेश भर में चलाए जा रहे आंदोलन के अगुवा भी इसी विधानसभा से आते हैं. विधानसभा मं बिजली की किल्लत सहित किसानों की समस्याएं मुद्दा बनती हैं.

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